भारतीय परतंत्र काल में अंग्रेजों की रणनीति थी कि ‘फूट डालो शासन करो।’ 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद अंग्रेजी शासन तो समाप्त हो गया, किन्तु राजनीतिक दलों ने समय-समय पर अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए देश की जनता को जातियों में बांटना शुरू कर दिया। 1979 से लेकर 1992 तक विभिन्न सरकारों ने मंडल आयोग के गठन से लेकर उनकी सलाहों के आधार पर जनता को जातियों में बांटने के प्रयास किए और एवं दुर्भाग्य से वे सफल भी हुए। इन सभी दलों की जातिगत बंटवारे की रणनीति वर्ष 2014 में पीएम मोदी के आने के बाद से विफल होती दिखी। जातिगत राजनीति विफल हुई तो जाति आधारित राजनीति दलों के अस्तित्व पर संकट आ गया।
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